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बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट मामले में NCPCR ने Meta India के MD और हेड को भेजा समन, बुधवार को है सुनवाई

 Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Sep 15, 2026 11:32 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 11:40 pm IST

इससे पहले 9 सितंबर को मेटा इंडिया के प्रतिनिधि NCPCR के सामने पेश हुए थे। सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत में काम करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा एक जरूरी शर्त है। इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PIXABAY

बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मटीरियल (CSEAM) वाले विज्ञापनों के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने Meta India के MD और हेड को एक बार फिर समन भेजा है। आयोग ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने के बाद यह कार्रवाई की है। मामले में सुनवाई 16 सितंबर (बुधवार) को तय की गई है।

नोटिस जारी कर मांगा था स्पष्टीकरण

दरअसल, NCPCR ने 3 जुलाई 2026 को Meta को CSEAM से जुड़े विज्ञापनों के मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। Meta की ओर से करीब एक सप्ताह बाद आयोग को जवाब सौंपा गया। जवाब मिलने के बाद NCPCR ने मामले की वास्तविकता का पता लगाने और तथ्यों की जांच के लिए औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया।

दोबारा समन भेजकर सुनवाई के लिए किया तलब

इसी जांच के सिलसिले में आयोग ने Meta India के MD और हेड को दोबारा समन भेजकर सुनवाई के लिए तलब किया है। NCPCR इस दौरान मामले से जुड़े तथ्यों और Meta की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी लेगा।

Meta ने अपनी नीति में किया बदलाव

CSEAM मामले में NCPCR की लगातार कार्रवाई के बीच Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग की अपनी नीति में बदलाव किया है। अब Meta की ओर से ऐसे मामलों की रिपोर्ट भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को किए जाने की बात सामने आई है।

बेंगलुरू के मामले में NCPCR ने की कार्रवाई

वहीं, बेंगलुरु में Capgemini द्वारा संचालित एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के कथित शोषण से जुड़े एक अलग मामले में भी NCPCR ने कार्रवाई की है। आयोग ने Capgemini के एक VP को समन भेजा है। इस मामले में भी आयोग जांच कर यह तय करने की कोशिश करेगा कि कथित घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ सरकार कर रही बातचीत

सरकार की चर्चाएं केवल मेटा तक सीमित नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के साथ भी बातचीत कर रही है ताकि हानिकारक सामग्री, विशेष रूप से बच्चों के लिए जोखिम पैदा करने वाली सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा सकें।

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